Social Reformers of 19th and 20th Century
Social Reformers of 19th and 20th Century: सामजिक तथा धार्मिक सुधार पुनर्जागरण तथा आंदोलनों में विभिन्न सुधारकों का योगदान रहा है l जिनमें प्रमुख हैं; राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती तथा स्वामी विवेकानंद l इनके अलावा और भी कई व्यक्तित्व हैं जिन्होंने सामजिक तथा धार्मिक सुधार आन्दोलनों में हिस्सा लिया तथा उनको आगे तक ले गए l
ये आन्दोलन तथा सुधार कर्यक्रम इतने प्रभावी रहे कि इनके प्रभाव से समाज पर बहुत गहरा तथा सकारात्मक प्रभाव पड़ा और समाज में धीरे – धीरे सकारात्मक परिवर्तन आने लगे l और वही परिवर्तन आज परम्पराओं के रूप में समाज निभा रहा है l जैसे पुराने समय में सती प्रथा, बाल विवाह आदि ये कुप्रथाएँ थी जो आज समाज के जागरूक होने के कारण सब ख़त्म हो गयी है l
इस लेख में (Social Reformers of 19th and 20th Century) आप तीन प्रमुख समाज सुधारकों के बारे में पढोगे l जिनका विवरण निचे दिया जा रहा है:
1. राजा राममोहन राय
राजा राममोहन राय 18 वीं तथा 19 वीं शताब्दी के एक महान समाज सुधारक थे l हालाँकि उनका जन्म 1772 में बंगाल में हुआ था पर फिर भी उनकी शिक्षायें पूरे भारत में लोगों को जागरूक करने में कामयाब रही l ब्राम्हण परिवार में जन्मे राजा राममोहन राय को अनेक नामों से जाना जाता है:
- सुधार आंदोलनों के प्रवर्तक
- आधुनिक भारत के पहले महान नेता
- भारत के नवजागरण के अग्रदूत
विश्व के कई धर्मों तथा देशों की संस्कृतियों का अध्ययन किया तथा उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति के आधुनिक ज्ञान का भी समर्थन किया l ‘आत्मीय सभा’ की स्थापना राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में की गई l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
- राजा राममोहन राय मूर्तीपूजा को बिलकुल भी समर्थन नहीं देते थे l इस मत के वे पूरी तरह से खिलाफ थे l वे केवल प्राचीन ग्रंथों तथा दर्शन में विश्वास करते थे l
- उन्होंने प्रसन्न कुमार टैगोर के नाम से एक किताब भी लिखी l
- उनके द्वारा ‘ब्रह्म सभा’ नाम से 1928 में एक नये समाज की स्थापना की गई l यही ब्रहम सभा आगे चलकर ब्रह्म समाज नाम से प्रसिद्ध हुआ l इसी कारण कहते हैं कि ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय है l
- 1929 ई. में उन्होंने सती प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी तथा उस समय के गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक को सती प्रथा के उन्मूलन के लिए मजबूर कर दिया l बेंटिक ने कानून बनाकर सतीप्रथा को गैर कानूनी घोषित कर दिया l
- 1817 में डेविड हेयर नामक व्यक्ति के साथ मिलकर कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना की l तथा 1825 में वेदांत कॉलेज की स्थापना की l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
- राजा राममोहन राय द्वारा लिखी गई प्रमुख पुस्तकें
- तुहफात – उल – मुवाहिदीन: यह पुस्तक 1804 में फ़ारसी भाषा में लिखी गई l इस पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य ‘एकेश्वरवादियों को उपहार’ था l
- मंजार्तुल अदयान: यह पुस्तक भी फ़ारसी भाषा में लिखी गई थी l
- संवाद कुमौदी: यह एक पुस्तक नहीं थी l यह बंगला भाषा में लिखा गया एक साप्ताहिक समाचार पत्र था l जिसे 1821 में शुरू किया गया था l
- मिरात उल अखबार: यह 1822 में लिखा गया एक अखबार था l जो फ़ारसी भाषा में लिखा गया था l
- बंगदूत: इसे हिंदी भाषा में 1829 ई. में लिखा गया था l
2. स्वामी दयानंद सरस्वती
(Social Reformers of 19th and 20th Century) में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम प्रमुख रूप से आता है l स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म वर्ष 1824 ई. में गुजरात राज्य में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था l इन्होंने वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना मुम्बई (उस समय बम्बई) में की l
स्वामी दयानंद सरस्वती के बारे में प्रमुख तथ्य
- बचपन का नाम: मूलशंकर
- सन्यास की दीक्षा ली: 24 वर्ष की आयु में
- गुरु: स्वामी विरजानंद
- प्रमुख पुस्तकें: (Social Reformers of 19th and 20th Century)
- सत्यार्थ प्रकाश: इस ग्रन्थ की रचना स्वामी दयानंद सरस्वती ने उदयपुर (राजस्थान) में की l तथा इस पुस्तक में अपने मूल विचारों को व्यक्त किया l इस ग्रन्थ में इन्होने ‘स्वदेशी राज्य को’ सर्वोपरि बताया है l
- वेदभाष्य भूमिका
- ऋग्वेद भाष्य
- पाखंड खंडन
- व्यवहार भानु
- जगन्नाथ गौड़ मिश्र के सहयोग से नहीं नन्ही बाई नाम की औरत द्वारा जहर देने के बाद 1883 में मृत्यु हो गई l
- 1886 में लाहौर में दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय की स्थापना की l स्थापना में इनके सहयोगी सदस्य रहे; हंसराज व लाला लाजपतराय l
- स्वामी श्रद्धानंद तथा लेखराम के सहयोग से 1902 में कांगड़ी नमक स्थान पर गुरुकुल विश्वविद्यालय की नींव रखी l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
- स्वामी दयानंद सरस्वती का अन्य नाम ‘हिन्दू लूथर’ है l
- कुछ लोगों ने दूसरे धर्मों को अपना लिया था l उनको वापस हिन्दू धर्म में लाने के लिए इनके द्वारा शुद्धि आन्दोलन चलाया था l
3. स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 ई. में कलकत्ता में हुआ था l तथा इनकी मृत्यु 1902 ई. में हुई l इनके गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था l उनकी याद में इन्होने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की l इनके बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था l तथा बाद में ये ‘ब्रह्म समाज’ के भी सदस्य बने l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
नरेन्द्रनाथ दत्त ने खेतड़ी महाराजा के सुझाव पर अपना नाम ‘स्वामी विवेकानंद’ रखा l इसके बाद स्वामी विवेकानंद 1893 में अमेरिका चले गए l वहां इन्होने एक सभा में भाग लिए तथा सभा को इस तरह से संबोधित किया कि वहां के सभी लोग इनके मुरीद हो गए l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
इनके संबोधन में था ‘भाइयों और बहनों’ l इस बात को सुनकर अमेरिकी लोगों ने इनकी सराहना की l और इनको सुनने के बाद अमेरिका के एक प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘न्यू यॉर्क हेराल्ड’ ने यह खबर छापी कि ‘ भारत जैसे देश में अपने धर्म प्रचारक भेजना सबसे बड़ी मूर्खता है क्योंकि भारत में पहले से ही ज्ञानी लोग भरे पड़े हैं l’
इस तरह का एक सम्मलेन फ्रांस में भी हुआ l उसमें भी स्वामी विवेकानंद जी ने हिस्सा लिए l सुभाष चन्द्र बोस ने इन्हें ‘राष्ट्रीय आन्दोलन का पिता’ कहकर पुकारा है l जब से यह नाम प्रसिद्ध हो गया है l (Social Reformers of 19th and 20th Century)
स्वामी विवेकानंद जी ने हिन्दू धर्म तथा इस्लाम धर्म के संगम की बात कही l इन दोनों धर्मों को लेकर धार्मिक सौहार्द्र की बात कही l उन्होंने सभी जातियों के कुष्ठपीड़ित तथा दरिद्र लोगों को अपने भगवान होने की बात कही l
स्वामी विवेकानंद जी द्वारा लिखी गई पुस्तकें
- मैं समाजवादी हूँ
- कर्मयोग
- ज्ञानयोग
- राजयोग
- प्रबुद्ध भारत
- उद्बोधन आदि l